आई, तुझी आठवण येते
सुखद स्मृतींच्या कल्लोळांनी काळिज काजळते
सुखद स्मृतींच्या कल्लोळांनी काळिज काजळते
वात्सल्याचा कुठे उमाळा, तव हातांचा नसे जिव्हाळा
हृदयांचे मम होऊन पाणी नयनी दाटून येते
आई तुझ्याविण जगी एकटा, पोरकाच मज म्हणति करंटा
व्यथा मनीची कुणास सांगू काळिज तिळतिळ तुटते
हांक मारितो ‘आई’ ‘आई’, चुके लेकरू सुन्या दिशाही
तव बाळाची हांक माउली का नच कानी येते?
| गीत | – | बाळ कोल्हटकर |
| संगीत | – | भालचंद्र पेंढारकर |
| स्वर | – | भालचंद्र पेंढारकर |
| नाटक | – | दुरितांचे तिमिर जावो |
| राग | – | मांड |
| गीत प्रकार | – | आई, नमन नटवरा |
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